IAS या IPS का सेलेक्शन होने के बाद रैंक कैसे तय की जाती है? क्या लगाया जाता है फॉर्मूला

UPSC Result 2023: देश के बहुत सारे स्टूडेंट्स का सपना होता है कि वे सिविल सेवा परीक्षा को पास करें और इसके लिए हर साल लाखों स्टूडेंट्स यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं जिसमें से चयनित सिर्फ हजारों स्टूडेंट्स यूपीएससी मेंस की परीक्षा देते हैं उसके बाद जो स्टूडेंट्स प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा को पास कर लेते हैं लास्ट में इंटरव्यू के बाद फाइनल में अच्छी रैंक पाते हैं तो आइये हम आपको बताते हैं कि इनमें आईएएस, आईएफएस, और आईपीएस की रैंक कैसे तय की जाती है.

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UPSC Result 2023: फाइनली अब यूपीएससी रिज़ल्ट 2022 को जारी कर दिया गया है और इस परीक्षा में इशिता किशोर ने टॉप रैंक हासिल की है इसके अलावा टॉप 20 में भी लड़कियां रही है पांचवें रैंक की टॉपर मयूर हजारिका ने आईएएस बनने की इच्छा ज़ाहिर की है वहीं दूसरे टॉपर ने आईएएस और आईपीएस बनने की इच्छा जताई है लेकिन क्या आपको पता है कि इन परीक्षाओं में क्वालीफाई होने के बाद क्या करना पड़ता है और टॉप रैंकर को अलॉट होने वाले आईएएस और आईपीएस कैडर के फॉर्मूले को कैसे समझ सकते हैं.

How is the rank decided after the selection of IAS or IPS? what formula is applied
How is the rank decided after the selection of IAS or IPS? what formula is applied

कैडर ऐसे तय किया जाता है

इसमें सबसे पहला सवाल ये होता है कि यूपीएससी एग्जाम पास करके कितने लोग सिविल सर्विसेज में जाते हैं तो आपको बता दें कि यूपीएससी पास करने के बाद 24 लोग सिविल सर्विसेज में जाते हैं क्योंकि यूपीएससी में टोटल मिलाकर 24 सर्विसेज होती है और इन्हीं के लिए स्टूडेंट्स का सेलेक्शन किया जाता है इसे दो कैटेगरी में बांटा गया है पहले ऑल इंडिया सर्विसेज, इसमें आईएएस, आईपीएस अधिकारी आते हैं इसमें जो लोग सिलेक्टेड होते हैं उनको राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों का कैडर बना दिया जाता है उसके बाद दूसरे नंबर पर सिविल सर्विसेज ग्रुप A और ग्रुप B सर्विसेज आती है.

ग्रुप ए, बी सर्विसेज क्या होती है?

ग्रुप ए सर्विसेज के अंतर्गत आईएफएस, इंडियन सिविल अकाउंट सर्विस, इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस, इंडियन रेलवे सर्विस, इंडियन रेवेन्यू सर्विस जैसे सभी सर्विसेज आती है इसके अलावा ग्रुप बी में आर्म्ड फोर्सेज, हेडक्वॉर्टर सिविल सर्विसेज़, पुडुचेरी सिविल सर्विसेज़ दिल्ली एंड अंडमान निकोबार आयरलैंड सिविल और पुलिस सर्विस जैसी सर्विसेज आती है यूपीएससी की परीक्षा सबसे कठिन परीक्षा होती है.

सबसे पहले सिविल सर्वेंट बनने के बारे में पूरी जानकारी लेते हैं

अगर आप यूपीएससी परीक्षा देना चाहते हैं तो इसके लिए आपका ग्रेजुएशन पास होना जरूरी है उसके बाद ही अब इसके प्रीलिम्स परीक्षा को दे सकते हैं और ये पेपर 2 घंटे का होता है इसमें पेपर के नंबर के आधार पर ही कटऑफ भी बनती है दूसरे पेपर सीटर क्वालीफाइंग पेपर होता है इसको पास करने के लिए इसमें आपका 33% मार्क्स लाना जरूरी है उसके बाद कट ऑफ के अनुसार ही से कैंडिडेट को मेन एग्जाम के लिए सेलेक्ट किया जाता है इसलिए मेंस के लिए आपको दोनों क्वालीफाइंग पेपर देना जरूरी होता है.

अब आपको मेंस परीक्षा देनी होती है मेंस परीक्षा काफी कठिन होती है इसमें पहले दो लैंग्वेज के पेपर होते है जो क्वालीफाइंग पेपर होते है इसमें 33% नंबर लाना जरूरी है ये नंबर मेरिट लिस्ट बनाने में नहीं जोड़े जाते हैं ये पेपर तीन 3 घंटे कराए जाते हैं इनमें दो भाषाओं में से एक इंडियन/रीजनल लैंग्वेज और दूसरा इंग्लिश लैंग्वेज का होता है.

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उसके बाद एक निबंध का पेपर कराया जाता है 3 घंटे में 2 निबंध लिखने पड़ते हैं निबंधों को लिखने के लिए अलग अलग टॉपिक भी दिए जाते हैं आप अपने अनुसार कोई भी टॉपिक पर निबंध लिख सकते हैं उसके बाद जनरल स्टडीज के चार पेपर कराए जाते हैं और सभी पेपर तीन 3 घंटे के होते हैं इसमें 1 दिन में दो से ज्यादा पेपर नहीं कराए जा सकते हैं लास्ट में ऑप्शनल पेपर होता है जिसमें दो पेपर होते है पेपर वन और पेपर टू, ऑप्शनल आपके द्वारा चुना जाता है आप जिसे भी चाहे उसका पेपर दे सकते हैं क्वालीफाइंग पेपर को छोड़कर बाकी के मार्क्स के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है.

डीएएफ फॉर्म को रोल नंबर क्या होता है?

जब मेंस का रिज़ल्ट आता है तो आपको एक फॉर्म भरना पड़ता है DAF के आधार पर आपका पर्सनैलिटी टेस्ट भी कराया जाता है जिसे डीएफ (डिटेल एप्लीकेशन फॉर्म) कहा जाता है इसमें दी गई सभी जानकारीयों के बेस पर ही आपका इंटरव्यू होता है डीएफ के फॉर्म में आपसे बैकग्राउंड, हॉबी और एजुकेशन के बारे में भी सवाल किए जाते हैं इंटरव्यू पास होने के बाद ये नंबर भी आपके मेरिट लिस्ट में जोड़े जाते हैं उसके बाद आपका रिज़ल्ट तैयार हो जाता है आपके रिज़ल्ट के आधार पर आपकी रैंकिंग की जाती है।

रेफरेंस को भी जगह मिलती है

अगर रैंकिंग की बात की जाए तो ये वैकेंसी पर डिपेंड करती है हर साल जितनी भी वैकेंसी निकाली जाती है किसी पोस्ट के लिए अलग अलग कैटेगरी यानी की जनरल, एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस में जितने भी विकल्प दिए होते हैं उसी के आधार पर ये तैयार होती है बाकी आपके मेन्स एग्जाम का फॉर्म भरते समय पहली प्रेफरेंस आईएएस, आईएफएस और आईपीएस जो भरी हो उस पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है उसके बाद एक मेरिट लिस्ट निकाली जाती है जिसके सबसे ज्यादा नंबर आते हैं वो अगर आईएएस आईएफएस प्रेफरेंस में होते हैं तो उन्हें वही रैंक दी जाती है उसके बाद धीरे धीरे घटते हुए मार्क्स के आधार पर कैंडिडेट को पोस्ट मिलती है.

फॉर्मूला क्या होता है?

लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि अगर 100 पोस्ट की वैकेंसी है तो उसमें से आईएएस के लिए 30 खाली पद है तो टॉप के 30 लोगों को ही आईएएस का पद दिया जाएगा ऐसा भी हो सकता है कि उन टॉप 30 लोगों में से किसी की कुछ और प्रेफरेंस हो जैसे आईपीएस या आईआरएस, तो इस समय मेरिट लिस्ट में थोड़ा पीछे रहे लोग अगर अपना प्रेफरेंस आईएएस का रखते हैं तो उन्हें पोस्ट दे दी जाती है.

इसी तरह से थोड़े पीछे रैंक के लोग भी ऊपर की पोस्ट पर सर्विस पा सकते हैं इसके अलावा आपको बता दें कि हर साल अलग अलग पदों पर निकलने वाली वैकेंसियों की संख्या अलग अलग होती है साल 2005 में 457 वैकेंसी थी और वहीं 2014 में ये बढ़कर 1364 हो गयी थी और एग्जाम देने वाले कैंडिडेट की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है यूपीएससी हर साल इन भर्तियों के हिसाब से मेंस एग्जाम और इंटरव्यू देने वाले कैंडिडेट्स की संख्या को तय करता है जैसे कि अगर 100 पदों के लिए वैकेंसी है तो इसके 12 से 13 गुना लोग मेंस एग्जाम के लिए सेलेक्ट किए जाते हैं उसके बाद लगभग 250 लोगों का इंटरव्यू के लिए सेलेक्शन होता है फिर फाइनल रैंक की लिस्ट में जिन लोगों का नाम होता है उन्हीं लोगों को इन सर्विसेज के अंतर्गत सेलेक्ट किया जाता है लेकिन आपको ध्यान रखना है कि ये सिर्फ उदाहरण है।

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