सीएम योगी ने बताया तरीका यूपी में रेशम की खेती से किसानों की इनकम होगी डबल

CM Yogi told the way farmers’ income will double from silk cultivation in UP: नमस्कार दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे तरीके के बारे में बताने वाले हैं जिससे रेशम की खेती में किसानों को अच्छा फायदा मिलेगा जी हाँ आज के टाइम में किसानों को रेशम उत्पादन के कारोबार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है और इसी को लेकर अब वाराणसी में एक सिल्क एक्सचेंज भी खोला गया है और अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सभी किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए अपने खेत की मेड़ पर शहतूत के पेड़ लगाने की भी सलाह दी है.

CM Yogi told the way farmers’ income will double from silk cultivation in UP: उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए तरह तरह के प्लान किए जा रहे हैं और इसी को लेकर अब एक नया प्लान तैयार किया गया है जिससे सरकार आने वाले समय में एक बड़ी संख्या में किसानों को रेशम की खेती से जोड़ने की कोशिश कर रही है और इसी को लेकर तब देश मुख्यमंत्री सह श्री आदित्यनाथ योगी जी ने किसानों को अपने खेत की मेड़ पर शहतूत के पेड़ लगाने की भी सलाह दी है और ऐसे में किसानों को प्रति 80 हजार रूपये से लेकर 1.25 लाख रूपये तक की इनकम मिल सकेगी और अब यूपी के लगभग 57 जिलों में रेशम उत्पादन किया जाने लगा है लेकिन इसके कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अब सरकार द्वारा वाराणसी में एक सिल्क एक्स्चेंज भी खोला गया है. इसे भी पढ़ें –  Financial assistance widowed women: विधवा महिलाओं को हर महीने ₹300 की आर्थिक सहायता,

प्रदेश में 350 टन रेशम का होता है उत्पादन

आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो उत्तराखंड प्रदेश से अलग हुआ था तो उत्तर प्रदेश में लगभग 22 टन रेशम का उत्पादन किया जाता था लेकिन अब प्रदेश में इस उत्पादन को बढ़ाकर 50 टन कर दिया गया है और अगले दो से 3 साल में भी रेशम के कारोबार को बढ़ावा देकर किसानों की आय को बढ़ाना चाहते है.

रेशम की खेती कैसे होती है

रेशम की खेती करने के लिए आपको शहतूत के पेड़ लगाना होता है क्योंकि रेशम का उत्पादन शहतूत के पेड़ से ही होता है शहतूत के पेड़ के पत्तों पर अपने लार से रेशम बनाते हैं और वैज्ञानिकों के अनुसार एक एकड़ जमीन में लगभग 500 किलोग्राम रेशम के कीटों की जरूरत होती है सिल्कवर्म की आयु दो से तीन दिन की होती है और इसमें हर रोज़ 200 से 300 अंडे देने की क्षमता होती है और 10 दिन में अंडे से लार्वा निकलता है. से भी पढ़ें – आखिर लड़कियों को कितने साल बाद मिलेगा लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ

लार्वा अपने मुँह से तरल प्रोटीन को निकालता है जैसे ही प्रोटीन हवा के संपर्क में आता है तो ये एक धागे के रूप में बदल जाता है और इस ककून कहा जाता है ककून का इस्तेमाल रेशम बनाने में होता है गर्म पानी का इस्तेमाल करने से ककून पर होने वाले कीट मर जाते हैं और कोण को फिर रेशम के धागे के रूप में ढाला जाता है.

रेशम की खेती में हैं बंपर मुनाफा

अगर आप रेशम की खेती करते हैं तो इससे आपको अच्छा फायदा होगा क्योंकि रेशम के धागे का इस्तेमाल साड़ियां और रु पट्टे बनाने में होता है और इस धागे की कीमत लगभग 2000 से ₹7000 किलो होती है तो ऐसे में रेशम की खेती करना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसे भी पढ़ें – PM matritva vandana yojana 2023: काम की खबर अब इस बच्चे पर ही मिलेगा इस योजना का लाभ, करना होगा ये काम

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